कहाँ है नजीब ? ढाई महीने बाद भी जबाव वही

ब्यूरो (राजाज़ैद) । नजीब की गुमशुदगी को ढाई महीना हो गया, आज भी सवाल वही है “नजीब कहाँ हैं” तो जबाव भी वही है “हम खोज रहे हैं”। यहाँ एक बड़ा सवाल यह है कि “पुलिस ने क्या किया जो ढाई महीने में नजीब को नहीं तलाश कर सकी”। नजीब की मां से मिलकर बड़ी बड़ी बातें करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, कांग्रेस नेता शहज़ाद पूनावाला जैसे नेताओं ने क्या किया ? उनकी आवाज़ अचानक क्यों बंद हो गयी ?

कुछ चीजें दिखने में साफ़ लगती हैं लेकिन वे अंदर से बेहद उलझी होती हैं । नजीब के मामले को भी यदि गौर से देखें तो कुछ ऐसा ही दिखता है । नजीब जिस रहस्यमयी तरीके से जेएनयू से गायब हुआ शायद पुलिस ने गंभीरता से नही लिया अन्यथा जांच के लिए मामला एक दूसरे विभाग पर न टाल दिया जाता । नजीब के लापता होने के कई दिनों बाद हरकत में आयी पुलिस ने पहले स्थानीय स्तर पर प्रयास किये लेकिन बाद में इस मामले को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिया गया ।

इस विशेष जांच दल ने पांच टीम बनाकर नजीब को तलाशना शुरू किया । पुलिस सूत्रों के मुताबिक पांच टीमो को अलग अलग राज्यो में भी भेजा गया था लेकिन सभी टीमें खाली हाथ वापस आयीं । बाद में इस मामले को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दिया गया । पुलिस ने इस मामले में सूचना देने वाले को पहले एक लाख रुपये और बाद में यह इनाम की राशि को बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दिया लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया ।

इस दौरान दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग ने यह कह कर कुछ उम्मीद जगाई कि नजीब को बिहार की किसी दरगाह पर देखा गया है । पुलिस सूत्रों की माने तो पुलिस टीम ने बिहार की कई दरगाहो को भी खंगाला लेकिन अंत में कुछ हासिल नही हुआ ।

नजीब कहाँ है :

जेएनयू का छात्र नजीब अहमद 15 अक्टूबर को अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में केम्पस से गायब हो गया था । बताया गया कि गायब होने से पहले उसका विधार्थी परिषद के एक नेता से झगड़ा और मारपीट भी हुई थी । इतना ही नहीं यह भी बताया गया कि उक्त छात्र नेता ने नजीब को धमकाया भी था ।

वहीँ नजीब की गुमशुदगी के बाद छात्रों ने कई जगह धरना प्रदर्शन भी किया। एक प्रदर्शन के दौरान नजीब की मां के साथ पुलिस की बदसलूकी का मामला भी कई दिनों तक मीडिया की हेडलाइन बना । अब चूँकि नजीब की गुमशुदगी को ढाई महीना हो चूका है इसलिए यह मामला और ज़्यादा संदेहास्पद हो गया है ।

नजीब की गुमशुदगी के बाद नजीब की मां से मिलने आये नेताओं ने बड़े बड़े वादे किये । यहाँ तक कि नजीब के लिए सुप्रीमकोर्ट तक जाने का भरोसा भी दिलाया लेकिन उस दिन के बाद से उक्त नेताओं के ज़ुबान पर ताला लगा है । ऐसा लगता है कि उक्त नेताओं ने नजीब की मां को सिर्फ मीडिया की सुर्खियां पाने के लिए बड़े बड़े दिलासे दिए थे ।

मुसलमानो का रहनुमा होने का दावा भरने वाले नेता अचानक नजीब मामले से पीछे हट गए । शायद यह इसलिए कि उनकी प्राथमिकता नजीब को खोजने में मदद करना नही था बल्कि उनकी प्राथमिकता खुद को बड़ा नेता साबित करने और मीडिया की सुर्खिया बनने की थी जो उन्होंने मीडिया में नजीब के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट तक जाने की बात कह कर हासिल कर लिया ।

फिलहाल इस मामले में पुलिस कुछ साफ़ नही बता रही है, नेता खामोश हैं और नजीब की मां की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं । नजीब कोई सुई नही जो गुम हो जाए और उसे पुलिस न ढूंढ पाए । एक बड़ा सवाल है कि जो पुलिस घरो में छिपाये पांच सौ और हज़ार के नोट और चलती गाड़ियों में से बीफ ढूंढ सकती है उसके लिए नजीब को ढूंढना मुश्किल क्यों हो रहा है ।

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