नोटबंदी: जुनेद क़ाज़ी के प्रयासों से मिली प्रवासी भारतीयों को बड़ी राहत

नोटबंदी: जुनेद क़ाज़ी के प्रयासों से मिली प्रवासी भारतीयों को बड़ी राहत

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नई दिल्ली । दूसरे देशो में रह रहे प्रवासी भारतीयों के लिए उस समय बड़ी राहत की खबर आयी जब आरबीआई ने चलन से बाहर किये गए उच्च मूल्य के पुराने नोट बदलने के लिए प्रवासी भारतीयों सहित उन लोगों के लिए शनिवार की रात शर्तें जारी की जो ऐसा करने में असफल रहे थे।

आरबीआई ने शनिवार देर शाम जारी एक बयान में कहा कि भारतीय नागरिक जो नौ नवंबर से 30 दिसंबर तक विदेश में थे, वे इस सुविधा का लाभ 31 मार्च 2017 तक उठा सकते हैं और प्रवासी भारतीय जो इस अवधि के दौरान विदेश में थे, वे चलन से बाहर हुए अपने नोट 30 जून 2017 तक बदल सकते हैं।

आईएनओसी के पूर्व अध्यक्ष जुनेद ने रिज़र्व बैंक के निर्देशो का स्वागत करते हुए इसे प्रवासी भारतीयों के लिए राहत भरा कदम बताया है । उन्होंने कहा कि अप्रवासी भारतीय देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूती देते हैं । वे दूसरे देशो में मेहनत करके कमाया गया पैसा भारत में निवेश करते हैं । उन्होंने कहा कि रिज़र्व बैंक का ताज़ा आदेश प्रवासी भारतीयों को उत्साहित करने वाला है ।

जुनेद क़ाज़ी ने बताया कि प्रवासी भारतीयो का पांच साल में जब भी स्वदेश आना हो उस समय पुराने नोट बदलने के लिए उन्हें एयरपोर्ट पर अथवा किसी विशेष बैंक शाखा में यह सुविधा उपलब्ध हो सके । वे इसके लिए विदेश मंत्रालय से बातचीत कर रहे हैं ।

गौरतलब है कि देश में 8 नवम्बर की रात 12 बजे से पांच सौ और एक हज़ार रुपये की नोटबंदी लागू होने के बाद प्रवासी भारतीयों के लिए एक बड़ी मुश्किल यह थी कि वे किस तरह भारत आकर अपने पुराने नोट बदले । देश में नोटबंदी लागू होने के बाद बैंको में लंबी लंबी कतारे लग्न शुरू हो गयी थीं ।

नोटबंदी लागू होने से पैदा हुई परेशानी को मद्देनज़र रखते हुए इन्डियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जुनेद क़ाज़ी ने इस दिशा में कोशिश करना शुरू किया । प्रवासी भारतीयों को नोट बदलने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग को लेकर दिनांक 27 नवंबर को न्यूयॉर्क में जुटे प्रवासी भारतीयों ने इंडियन काउंसलेट के समक्ष आईएनओसी के पूर्व अध्यक्ष जुनेद क़ाज़ी के नेत्रत्व में प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया ।

ज्ञापन में मांग की गयी कि ज्ञापन में मांग की गयी कि सरकार अप्रवासी भारतीयों के पुराने नोट बदलवाने के लिए कोई रास्ता निकाले । ज्ञापन में कहा गया कि अप्रवासी भारतीय देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूती देते हैं । वे दूसरे देशो में मेहनत करके कमाया गया पैसा भारत में निवेश करते हैं । सरकार को चाहिए कि वह अप्रवासी भारतीयों की तकलीफो पर गौर करे।

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