मालेगांव ब्लास्ट: आरोपियों को बचाने के लिए एनकाउंटर में मारे गए आरोपियों को फरार दिखाया गया!

सोलापुर । महाराष्ट्र एटीएस के एक निलंबित अधिकारी ने 2008 के मालेगांव ब्लास्ट के बारे में सोलापुर कोर्ट में बेहद सनसनीखेज दावे किए हैं। आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) के पूर्व वरिष्ठ इंस्पेक्टर महमूद मुजावर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले के मारे जा चुके दो आरोपियों को वरिष्ठ अफसरों ने जानबूझ कर जीवित और फरार बता दिया है।

सिर्फ इतना ही नहीं बम रखने के यह दोनों आरोपी संदीप डांगे और रामचंद्र कलसांग्रा एटीएस के हाथों फर्जी एनकाउंटर में पहले ही मारे जा चुके हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने एटीएस के पूर्व अधिकारी मुजावर के इन आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार इस मामले की जांच करेगी। फड़नवीस ने मुजावर के दावे पर कहा कि पत्र में लगाए गए आरोप सभी हैं या नहीं यह देखने की जरूरत है। वहीं राकांपा के प्रवक्ता नवाब मलिक ने भी मामले की जांच की मांग की।

सोलापुर की मजिस्ट्रेट अदालत में 19 अगस्त में दायर हुई इस याचिका में संदीप डांगे और रामचंद्र कलसांग्रा की मौत का दावा विगत गुरुवार को सुनवाई के दौरान सबके सामने आया। उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता मुजावर आर्म्स एक्ट के एक मामले में निलंबित चल रहा है। मुजावर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उसके खिलाफ साजिशन मामला दर्ज किया गया। उस पर दबाव डालने की कोशिश हुई ताकि वह डांगे और कलसांग्रा की मौत की सच्चाई उजागर न कर दे।

निलंबित अधिकारी मुजावर के दावे के बारे में पूछे जाने पर एटीएस के पूर्व प्रमुख केपी रघुवंशी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें मुजावर नाम के किसी व्यक्ति की याद तक नहीं। उन्हें यह भी नहीं पता कि मालेगांव ब्लास्ट केस को देख रही टीम में वह था भी या नहीं। रघुवंशी ने कहा कि एटीएस में उनके कार्यकाल में तो कम से कम ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।

इसी तरह एटीएस से रिटायर हो चुके एक अन्य पुलिस अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर मुजावर के दावे पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा कि यह आरोप मुजावर ने आठ साल के बाद ही क्यों लगाए। इस अधिकारी को इतनी महत्वपूर्ण जानकारी पहले उजागर करने से कौन रोक रहा था। हमें उसके दावे पर भरोसा नहीं है।

उल्लेखनीय है कि 39 सितंबर 2008 में मालेगांव के भिखू चौक पर एक मोटर साइकिल में हुए बम विस्फोट में सात लोग मारे गए थे और करीब सौ लोग जख्मी हुए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि मालेगांव ब्लास्ट दक्षिणपंथी कट्टरपंथियों ने कराया था।

इस मामले में फिलहाल ले.कर्नल प्रसाद पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 11 लोग जेल में हैं। दरअसल पहले इस मामले को महाराष्ट्र एटीएस देख रही थी लेकिन बाद में इस मामले को एनआइए को सौंप दिया गया। एनआइए ने एक अनुपूरक चार्जशीट दाखिल करके सुबूत के अभाव में मकोका के तहत लगाए गए सभी मामले हटा लिए।

एनआइए ने साध्वी और पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट भी हटा ली। एनआइए ने ना सिर्फ साध्वी को बल्कि शिवनारायण कालसांग्रा, श्याम साहू, प्रवीण टक्कलकी, लोकेश शर्मा और धन सिंह के खिलाफ मामले भी वापस ले लिए।

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