सपा: सुलह की उम्मीदें लगभग खत्म, अलग अलग चुनाव लड़ने पर चल रहा विचार

सपा: सुलह की उम्मीदें लगभग खत्म, अलग अलग चुनाव लड़ने पर चल रहा विचार

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नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। समाजवादी पार्टी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बीच पिछले दो दिनों से चल रहे बैठको के दौर बेनतीजा साबित हुए हैं । सपा सूत्रों के अनुसार दो मुद्दों पर अभी पेंच फंसा हुआ है । सूत्रों ने बताया कि दो मुद्दों में से एक मुद्दा यादव परिवार से जुड़ा हैं जबकि दूसरा मुद्दा समाजवादी पार्टी संगठन को लेकर है । इन दोनो मुद्दों पर सपा सुप्रीमो पीछे हटने को तैयार नहीं हैं । अब दोनो खेमे अलग अलग चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं ।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी में पैदा हुई रार के हल के लिए पिछले दो दिनों में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच कई बार बैठके हुईं हैं। सूत्रों ने बताया कि पहली बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश की तरफ से पार्टी सांसद अमर सिंह की बिना शर्त सपा से छुट्टी की मांग रखी गयी थी जिसे सपा सुप्रीमो ने स्वीकार करते हुए सपा सांसद से इस्तीफा देने को कहा था । जिसके बाद पार्टी सांसद अमर सिंह ने पार्टी से बिना शर्त इस्तीफा दे दिया लेकिन इसके बावजूद समाजवादी पार्टी का संकट खत्म नही हुआ ।

कल भी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश के बीच दो बार बैठकें हुईं लेकिन दोनो बैठको में कोई नतीजा नही निकला । इससे पहले कल माना जा रहा था कि शाम होते होते सपा सुप्रीमो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते की घोषणा करेंगे लेकिन बाद में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस रदद् कर दी गयी ।

सूत्रों ने बताया कि आज इस मामले में मुलायम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर सकते हैं । सूत्रों ने कहा कि आज मुलायम विधानसभा चुनाव के लिए अपने खेमे के उम्मीदवारों के नाम भी घोषित कर सकते हैं ।

अब यह माना जा रहा है कि जिन मुद्दों पर पेंच फंसा है उन पर समझौता होने के आसार न के बराबर हैं । ऐसे में दोनो गुटो के पास सिवाय अलग अलग चुनाव लड़ने के अलावा कोई और रास्ता नही बचा है । सपा सूत्रों के अनुसार पार्टी सपा में सुलह के लिए बड़ी भूमिका निभाने वाले पार्टी के कद्दावर नेता आज़म खान भी अब खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं ।

सपा सूत्रों ने बताया कि अब सुलह के कोई आसार नही दिखते अब कोई करिश्मा ही सपा को टूटने से बचा सकता है । यदि समाजवादी पार्टी के दोनो खेमे अलग अलग राह पर चले तो पार्टी का सिम्बल “साईकिल” बचाना भी मुश्किल हो सकता है । ऐसे में सपा के सामने मतदाताओं के बीच एक बार फिर पहचान बनाना बड़ा मुद्दा होगा ।

 

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