सहारा डायरी मामला : याचिकाकर्ता एनजीओ ने कहा, जांच के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद

नई दिल्ली । आयकर के छापों दौरान बरामद दस्तावेजो के आधार पर आदित्य बिड़ला और सहारा समूह की कंपनियों द्वारा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अन्य कुछ नेताओ को रिश्वत देने का आरोप लगाने वाले गैर सरकारी संगठन(एनजीओ) सीपीआईएल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि आयकर विभाग की अप्रैजल रिपोर्ट, डायरी और ई-मेल साफ-साफ इशारे करती है कि राजनेताओं को रिश्वत दी गई थी, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को जांच का आदेश देना चाहिए।

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि यह विरले ही होता है जब अदालत या जांच एजेंसी के समक्ष ऐसे पुख्ता दस्तावेज पेश किए गए हों। ऐसे में अगर इस मामले में जांच का आदेश नहीं दिया जाता तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी भी मामले में जांच का आदेश देना न्यायसंगत नहीं होगा।

हलफनामे में कहा गया है कि बिड़ला समूह पर सीबीआई केछापे और सहारा समूह की कंपनियों पर आयकर विभाग केछापे में अघोषित रकम, डायरी, नोटबुक, ई-मेल समेत कई अन्य दस्तावेज मिले थे। इन दस्तावेजों से साफ है कि इन कंपनियों द्वारा राजनेताओं और नौकरशाहों को रिश्वत दी गई थी।

हलफनामे में कहा गया है कि ललिता कुमारी के मामले में संविधान पीठ ने कहा था कि अगर जांच एजेंसी के संज्ञान में अगर किसी तरह का गंभीर अपराध आता है तो एफआईआर दर्ज किया जाना चाहिए। लिहाजा इस मामले में उपलब्ध कराए गए दस्तावेज जांच कराने के लिए पर्याप्त है। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी भी अथॉरिटी ने इन दस्तावेजों की विश्वसनीयता को नकारा नहीं है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल(एसआईटी) से जांच करने का निर्देश देना चाहिए।

मालूम हो कि गत 16 दिसंबर को हुई सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने यह सवाल उठाया था कि जस्टिस जेएस खेहड़ को इस मामले पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि चीफ जस्टिस नियुक्त करने संबंधी उनकी फाइल सरकार केपास लंबित है। भूषण की इस दलील को जस्टिस खेहड़ और अटॉर्नी जनरल ने अनुचित और गलत बताया था।

याचिका में कहा गया है कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात मुख्यमंत्री थे तब उन्हें कॉरपोरेट घरानों ने रिश्वत दी थी। याचिका में मोदी केअलावा दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और मध्य प्रदेश केमुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर भी रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है।

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