मोदी शासनकाल में प्रतिदिन 35 किसान आत्महत्या करते हैं!

नई दिल्ली। एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा कराए गए सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कांग्रेस ने आज आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश में प्रतिदिन औसतन 35 किसान आत्महत्या करते हैं।

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख उत्तम कुमार रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र सरकारों की ‘‘किसान विरोधी’’ नीतियों के कारण तेलंगाना में तीन किसान प्रतिदिन आत्महत्या करते हैं।

रेड्डी ने आरोप लगाया, ‘‘तेलंगाना में अभी तक 2964 किसान आत्महत्या कर चुके हैं :पिछले तीन वर्षों में:। राज्य में औसतन तीन किसान आत्महत्या करते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में पिछले तीन वर्षों में प्रतिदिन औसतन 35 किसानों ने आत्महत्या की।’’

तेलंगाना में 2019 में होने वाले चुनावों में कांग्रेस के सत्ता में आने का विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के लिए रिण माफी की योजना लागू करेगी जिसके तहत हर किसान के दो लाख रूपये का कर्ज माफ किया जाएगा।

आपको बता दें कि साल की शुरुआती राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में सूखे और कर्ज के कारण 12602 किसानों और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या कर ली थी।

30 दिसंबर को जारी की गई ‘एक्सिडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड इन इंडिया 2015’ नामक रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 के मुकाबले 2015 में किसानों और कृषि मजदूरों की कुल आत्महत्या में दो फीसदी की बढ़ोतरी हुई। साल 2014 में कुल 12360 किसानों और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की थी।

रिपोर्ट में उन सभी किसान माना गया है जिनके पास अपना खेत हो या लीज पर खेत लेकर खेती करते हैं। रिपोर्ट में उन लोगों को कृषि मजदूर माना गया है जिनकी जीविका का आधार दूसरे खेतों पर मजदूर के रूप में काम करना है।

रिपोर्ट के अनुसार किसानों, कृषि मजदूरों की आत्महत्या के पीछे कंगाली, कर्ज और खेती से जुड़ी दिक्कतें प्रमुख वजहें रहीं। इन तीन कारणों से करीब 38.7 फीसदी किसानों ने आत्महत्या की। आंकड़ों के अनुसार आत्महत्या करने वाले 73 फीसदी किसानों के पास दो एकड़ या उससे कम जमीन थी।

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TeamDigital